How to avoid negative thinking

एक ही चीज जो सारा दिन चल रही है वो है Thinking…
लेकिन हम कहते हैं कि सोच आ गई, हम यह नहीं कहते कि मैंने क्रिएट की।
जैसे वह सोच बाहर से आई है लेकिन ध्यान दीजिए वह सोच बाहर से नहीं, भीतर से आती है बस इसकी डायरेक्शन सही होनी चाहिए। इसीलिए मन को जानना समझना बहुत इंपॉर्टेंट है, क्योंकि मन ही हमारे जीवन की फाउंडेशन है। फाउंडेशन जितनी मजबूत होगी उतना ही हम सुखद जीवन जी पाएंगे… नहीं तो कोई भी हमें हिलाकर जा सकता है। शरीर, परिवार, प्रोफेशन और एक दूसरे को संतुष्ट करने के लिए हम कितनी मेहनत करते हैं, कितनी हम शरीर की देखभाल करते हैं, लेकिन फिर भी शरीर में कहीं ना कहीं कुछ ना कुछ दर्द हो ही जाता है। और रिश्तो में भी कभी कोई, कभी कोई, नाराज रहता ही है, और कभी कोई ऐसा कर देता है जो हमने कभी सोचा भी नहीं होता। हमारे किसी भी काम से कोई खुश नहीं रह सकता.. ऐसा लगता है, यहां कुछ भी स्थिर नहीं है लेकिन एक चीज है, भीतर में, अंतस में , जो हमेशा स्थिर है और हैप्पीनेस में है, वह है हमारा अस्तित्व हमारी एक्जिस्टेंस इसी को जानने के लिए हम भगवत गीता का अभ्यास कर रहे हैं।

Vol 248 मैं अर्जुन का बहुत प्यारा प्रश्न है, भगवान श्री कृष्णा से… अर्जुन कह रहे हैं, ऐसा साधक जिसे श्रद्धा तो है, लेकिन संयम ही नहीं है और समाधि में जाने से पहले ही जिसका मन विचलित हो जाता है ऐसा साधक किस गति को प्राप्त होता है….
और यह प्रश्न हम सभी का होता है। हमें श्रद्धा तो पूरी है अंतस धारा पर… लेकिन जब संयम की बात आती है कि क्या खाना है, क्या बोलना है, क्या सोचना है हम निर्णय नहीं ले पाते। उस समय पर हमें क्या करना है भगवान श्रीकृष्ण इस वॉल्यूम में यही बता रहे हैं।
On Namah🙏

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Antas Yog by Indu Jain
Om Guruve Namah

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प्यास ही परमात्मा by Indu Jain ( Yoga Expert ) Relax Mind with Meditation

कीमत पानी की नहीं, प्यास की होती है कदर मौत की नहीं, सांस की होती है। प्यार तो बहुत लोग करते हैं दुनिया में पर कीमत प्यार की नहीं, विश्वास की होती है।

और सबका अपना अपना विश्वास होता है यानी अपनी अपनी याद। उसे कोई किसी भी नाम से पुकार सकता है। खैर ... नाम में क्या रखा है छोड़ो।

कुछ पल बंद आंखों से हम उसे याद करें और ठहर जाएं अपनी याद में जो हमें विस्मृत हुआ है। अपनी ओर उन्मुख रहना मन के स्वभाव मे खो जाने की आदत अपने आप टूटेगी। आप अपनी remembrance में रहना।

अपने को सुखद और स्वस्थ रखने के लिए अपने आपसे एक छोटी सी प्रतिज्ञा करना कि हमें जीवन में सतगुरु का साध मिले, ओर हम साधना की डोर पकड़ कर हम मन की अंधी दौड़ को अटका कर भीतर की वास्तविक शोध को प्रारंभ करें। हम अपने भीतर जरूर उतरेंगे, थोड़ी देर इस विचार को भीतर रम जाने दीजिए।

लेकिन क्या करें बार-बार माइंड की आदत हम पर हावी हो जाती है हम पुनः माइंड के साथ लगते ही dualistic state में चले जाते हैं और इस duality से बचने का एक ही तरीका है वो है मेडिटेशन। यही एकमात्र ऐसी दवा है जो हमारे जीवन में संतुलन ला सकती है। यह पॉजिटिविटी को बढ़ावा देती है और पॉजिटिव माइंड ही उस परम के निकट होता है।

बस तुम अब और अभी में रहना। जब जब तुम जागते हो तुम प्रेजेंट मोमेंट में होते हो और जब तुम अपनी वास्तविक याद में होते हो तुम अपने real residence में होते हो लेकिन आज तक किसी ने हमें अपने घर का पता नहीं बताया, इसीलिए हम बाहर के घरों में सुख को ढूंढ रहे हैं। हमने उसे वहां पाना चाहा जहां वह है नहीं। इसीलिए हमारा मन अशांत,अतृप्त और दुखी रहता है। बात बात पर हम anger and reactions करते हैं अगर तुम्हें अपने को देखने का जरा सा भी interest है या प्यास है, तो तुम्हारा देखना बहुत रुचिकर हो जाता है वास्तव में यह भीतर देखना ही भीतर की सफाई है भीतर का सुधार है, इंप्रूवमेंट है।

ढूंढना खोजना एकमात्र मिलन की घड़ी को संभव करता चला जाता है अधिक से अधिक भीतर डूब जाना भाव दशा में उस विराट के लिए चंद कुछ सांसे, जो तुम्हें एक्चुअल में सकून देगी आज तक रुदन उतरा है उस संसार के लिए लेकिन सब रुल गया अब थोड़ी देर उसके लिए भी प्यास उठे तभी आपका रोम रोम एनर्जी से भरपूर हो जाएगा, तभी तुम वास्तविक जीवन जी पाओगे।

वर्तमान में..... अब यह प्यास कभी ना बुझने पाए, न हीं तृप्त हो पाए मैं तृप्ति नहीं चाहती तृप्त नहीं होना मुझे बस प्यास ही प्यास बरसती रहे अब मुझे अनुभव हो गया कि प्यास ही परमात्मा है तू केवल प्यास में बरसता है तू केवल अश्कों में रहता है, जहां-जहां सागर उमड़ते हैं तू महासागर हो करके आता है तो एकमात्र उस रिश्ते में उतर कर आता है जिसका कोई नाम नहीं,तू unconditional love में उतरता है तू तभी पिघलता है, तू सरल सहज हो जाता है फिर तू कठोर नहीं रहता ओ... विराट विश्वास तू करुणाजनक हो जाता है, एक प्यास तुझको रिझा पाती है ऐसा मिला समंदर कुछ और प्यासा कर गया... कुछ और प्यासा कर गया।

प्यास के मारे हैं, या तेरी चाहत के मारे हैं, जो भी कह लो बस हम तो तुम्हारे सहारे हैं ओ विश्वास ...ओ विराट.... ओ मुर्शिद

Guru kripa

व्याकरण संबंधी किसी भी त्रुटि के लिए मैं क्षमा प्रार्थी हूं।

आपके जीवन में इस विश्वास की कितनी importance है कमेंट सेक्शन में अपने अनुभव जरूर शेयर कीजिए।

Thanks

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