चाहत का नशा / Experience the Bliss

What is Spirituality

मैंने तुझे चाहा, तूने चाहा किसी और को। खुदा करे, तू जिसको चाहे वो चाहे किसी और को।

सच्चाई है यह जीवन की, सामान्यता ऐसा होता है या नहीं, क्या हमने अपने जीवन में नहीं देखा, कि तुम जिसे चाहते हो वो किसी और को चाहता है और वो जिसको चाहता है वह किसी और को चाहता है, यहां हर किसी की प्रायोरिटी अलग-अलग है। बस एक ही प्रायोरिटी हमें नहीं लगती, कि उसे भी कुछ समय दिया जाए – उसके साथ भी कुछ समय बिताया जाए, जिस रिश्ते का कोई नाम नहीं । उससे भी संबंधों को प्रगाढ़ किया जाए।

ध्यान रहे, जब भगवान भक्त के आधीन होते हैं तो आधे अधूरे नहीं होते, ऐसा नहीं होता कि आधी कृपा हुई और आधी कृपा नहीं हुई । कृपा करेंगे तो पूरी पूरी, जो भी संबंध प्रभु के साथ होगा वह पूरा पूरा होगा – आधा अधूरा नहीं बस भगवान से संबंध हमें भा जाए, क्योंकि एक वही तो है – किसी ने ठीक ही कहा है कि एक यही ख्याल तो सकुने जिंदगी है, कि मेरा हर वादा भी तुमसे है, मेरा हर दावा भी तुमपे है।

एक प्रभु ही है जो संबंध निभाते हैं इंसान तो संबंध बनाता है फिर उसी संबंध का उपहास करता है लेकिन प्रभु क्या करते हैं, कोई अभावग्रस्त भी आ जाए उस पर कृपा कर उसे सत्संग सुलभ कराते हैं, प्यास भी देते हैं, फिर उनकी कृपा से जीव उस शक्ति से संबंध स्थापित कर हृदय से पुकार उठाता है।

जिस श्वास तुझे भूलूं वो श्वास ठहर जाए, प्रभुवर तेरे चरणों में हर श्वास गुजर जाए।

भीतर झांकना, पढ़ना सुनना सत्संग ध्यान नहीं है। सुनकर या पढ़कर जो तुम्हें छू जाए वह परम घटना, जो तुम्हारे जीवन के हर पहलू को बदलने की क्षमता रखती है फिर तुम उस तत्व की खोज करने निकलते हो जो हमेशा रहता है जो सनातन रहता है, जो परिवर्तन में कभी जाता ही नहीं, फिर तुम्हारा अधिक समय उस खोज में निकलता है सामान्यतः जीवन जीते हुए भी तुम हर पल उसे connected रहते हो और यही है चाहत का नशा।

जरा सा सोच विचार करना – हम सभी सुख और आनंद की तलाश में है लेकिन हम उसे गलत जगह पर ढूंढ रहे हैं, क्या तुम्हारा खोया हुआ सुख परिवार में, संपत्ति में, साधनों में मिल सकता है, नहीं कभी नहीं। ये वही मिल सकता है, जहां वह खोया है वह जहां है उसे उसी दिशा में खोजना होगा और वह किसी hier की वाइब्रेशंस के बिना या यह कहिए किसी की चाहत के नशे के बिना संभव नहीं जिसके चित् में जितनी गहरी चाहत होगी, वह उतनी ही परिपक्वता के साथ, उतनी ही तन्मयता के साथ उसे उस दिशा में खोजने जाएगा जहां वह वास्तव में सुख और आनंद पड़ा है।

लेकिन हम यह बात समझने में कितना समय और लगाएंगे कितना और पढ़ेंगे, सुनेंगे, कितने विचारों की और पुनरुक्ति करेंगे। कब भीतर की ओर बढ़ेंगे वैसे इन्हीं बातों का बार-बार विचार करना, यह भी उसी की मर्जी से हो रहा है आज आर्टिकल भी आप पढ़ रहे हैं, तो समझना आपके भीतर कहीं ना कहीं उस चाहत का नशा है, आप और भी पीना चाहते हैं तभी तो यह बातें आपको रसप्रद लग रही है। आपको यह बातें कहीं ना कहीं झकझोर रही हैं। कहां सुख खोया हमारा और हम कहां ढूंढने चले। हम बार-बार इस पर विचार करें, कि बार बार आना जाना तो सृष्टि का नियम है इसमें ऐसा कौन सा तत्व है जो आता जाता नहीं, जो बनता बिगड़ता नहीं उस तत्व की खोज में जब हम अपना यह मनुष्य जीवन बिताते हैं, वही जीवन चाहत के रंग में रंगा है, और वही जीवन ईश्वर की अनुभूति के लायक है, वही वास्तव में उसकी कृपा का पात्र है।

कुछ देर आंखें बंद करके इन विचारों को भीतर जाने दीजिए जब किसी हायर की बात तुम्हें छू जाए, वो बात छूते ही तुम्हें रूपांतरित करती है यदि करती है, तो वो चाहत का नशा है। तुम सत्य की खोज में यानी खुद की तलाश में निकल जाओ यह चाहत का रंग है जो कभी नहीं घट सकता हमेशा बढ़ता ही है।

बाकी सभी नशे कुछ दिन में, कुछ सालों में उतर जाते हैं लेकिन यह नशा जीवन के साथ-साथ और जीवन के अंत तक भी रहता है। और यह चाहत का नशा ध्यान में उतरते उतरते हमारे चित् में प्रगट होता है कुछ लंबी सांस लेकर इस विचार को गहराई में उतर जाने दीजिए।

हमने सब कुछ पढ़ा, समझा जानते सब कुछ है, लेकिन जी नहीं पाते क्योंकि अभी उसकी चाहत की कमी है। चाहत यानी चाहना, फिर संसार की कोई चाहत नहीं रहती जिसके आगे संसार के तमाम सुख फीके लगते हैं। बंद आंखों से हम प्रतिज्ञा करते हैं, कि संसार के स्वरूप को समझकर चाहत के स्वरूप को समझकर, उसकी वाइब्रेशंस में एक कदम आगे बढ़ाएंगे इसी प्रतिज्ञा के साथ पूरा दिन पल पल अपने साथ रहना, जागे रहना।

बोध बस इतना सा है, कि जिस पल तुम्हें पता चल जाए कि तुम कुछ गलत कर रहे हो उसे तत्क्षण बदलने की, छोड़ने की हिम्मत रखना, यहां सब कुछ आता और जाता है बस तुम हिम्मत करना अपने अंतस को सवारने की और जिसके संवरते ही तुम्हारी दुनिया संवर जाती है।

तुझे चाहने वालों को चाहत ना रहें कोई तुझे भूलने वालों को राहत न रहे कोई तुझे पाके भुला दे जो, वो इंसा कहा जाए वह प्यासा किधर जाए।

 

Om Namah

व्याकरण संबंधी अगर कोई त्रुटि हो तो मैं क्षमा प्रार्थी हूं।

आपके जीवन में किसी की चाहत का नशा है या नहीं अपने अनुभव हमें कमेंट सेक्शन में जरूर शेयर कीजिए।

 

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